आर्यों के द्वारा निर्मित सामाजिक-सांस्कृतिक तथा आर्थिक व्यवस्था वैदिक संस्कृति के रूप में जानी जाती है। 1500 ई.पू. से 600 ई.पू. के कालखण्ड को वैदिक काल कहा जाता है।
इस सभ्यता के संस्थापक आर्य थे, इसलिए इसे आर्य सभ्यता भी कहा जाता है।
यहाँ आर्य शब्द का अर्थ है श्रेष्ठ, उत्तम, उदात्त, अभिजात्य, कुलीन, उत्कृष्ट एवं स्वतन्त्र आदि।
ईरान की पवित्र पुस्तक जेन्दावेस्ता तथा बोगजकोई अभिलेख से स्पष्ट होता है कि आर्य ईरान से होकर भारत आए थे। भारत आकर जिस क्षेत्र में बसे उसे सप्त सैन्धव प्रदेश कहा जाता है।
आर्यों के जीवन को समझने के लिए इसे दो भागों में बाँटा जाता है। 1500 ई.पू. से 1000 ई.पू. के. कालखण्ड को ऋग्वैदिक या पूर्व वैदिक काल, जबकि 1000 ई.पू. से 600 ई.पू. तक के कालखण्ड को उत्तर वैदिक काल कहा जाता है।