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राजस्थान के प्रमुख मेले | Rajasthan ke Pramukh Mele Notes | Trick | PDF

राजस्थान के मेले और त्यौहार | राजस्थान के प्रमुख पशु मेले – दोस्तों आज हम इस पोस्ट में राजस्थान में आयोजित होने वाले प्रमुख मेलों के बारे में बताएंगे। इसके साथ वे मेले कब और कहां आयोजित किए जाते है इसके बारे में भी चर्चा करेंगे। राजस्थान में सरकार द्वारा आयोजित सभी प्रकार के एग्जाम में यहां से प्रश्न पूछे जाते है। यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी साबित होगी। यहां पर आपको राजस्थान के सभी टॉपिक्स के नोट्स उपलब्ध करवाए जा रहे। इन टॉपिक को पढ़कर आप अपनी तैयारी को और बेहतर बना सकते है।

बाड़मेर के मेले –

(1) कजली मेला – गोपीनाथ गढ़ (बाड़मेर)
यह मेला अश्विनी नवरात्र के प्रथम रविवार को भरता।

(2) मल्लीनाथ पशु मेला – तिलवाड़ा (बाड़मेर)
यह मेला चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी तक भरता है।
यह मेला राजस्थान का सबसे प्राचीन मेला है।

(3) सुईया मेला – चौहटन ( बाड़मेर )
यह मेला पौष अमावस्या को भरता है।
यह मेला चार साल में एक बार भरता है। जिस कारण से इसे अर्द्धकुंभ कहा जाता है।

(4) बसंत मेला – सीणधारी ( बाड़मेर )
यह मेला मार्गशीर्ष कृष्ण तृतीय को भरता है।

(5) कनाणा मेला – कनाणा (बाड़मेर )
यह मेला प्रतिवर्ष शीतलाष्टमी के दिन भरता है।
इस मेले में गैर नृत्य किया जाता है।

(6) नाकोड़ा मेला – नाकोड़ा (बाड़मेर)
यह मेला पौष कृष्ण दशमी को भरता है।

(7) थार समारोह – बाड़मेर
इस समारोह का आयोजन चैत्र शुक्ल षष्ठी को किया जाता है।

(8) विरातरा मेला – चौहटन (बाड़मेर )
यह मेला माघ शुक्ल त्रयोदशी तथा भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी को भरता है।

(9) खेड़ा मेला – बालोतरा ( बाड़मेर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तथा नवमी को भरता है।

(10) कपालेश्वर महादेव मेला – चौहटन ( बाड़मेर )
इस मरुस्थल का कुम्भ कहा जाता है।

अजमेर के मेले –

(1) पुष्कर का मेला – पुष्कर ( अजमेर )
यह मेला कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भरता है।
पुष्कर के मेले में भारत सरकार के द्वारा2007 में 2 रुपए की डाक टिकट जारी की गई ।
यह मेला राजस्थान का सबसे बड़ा तथा सर्वाधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन वाला मेला है।
इस मेले को मेरवाड़ा का कुम्भा कहते है।
इस मेले को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है।

(2) तेजाजी मेला – ब्यावर, केकड़ी ( अजमेर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल दशमी जिसको (तेजादशमी) को भरता है।

(3) बादशाह मेला – ब्यावर ( अजमेर )
यह मेला फाल्गुन पूर्णिमा को भरता है।

(4) ख्वाजा साहब का उर्स – अजमेर
यह मेला रज्जव माह की 1-6 तारीख को भरता है।
यह पनांव शाह पीर का उर्स – अढ़ाई दिन के झोपड़े में ।

(5) कल्पवृक्ष मेला – मांगलियावास ( अजमेर )
यह मेला श्रावण अमावस्या को भरता है।

बांसवाड़ा के मेले –

(1) घोटिया अम्बा मेला – घोटिया घाम ( बांसवाड़ा )
यह मेला चैत्र अमावस्या को भरता है।

(2) मानगढ़ मेला – मानगढ़ ( बांसवाड़ा )
यह मेला मार्गशीर्ष की पूर्णिमा ( शरद पूर्णिमा ) को भरता है।

(3) अंदेश्वर मेला – बांसवाड़ा
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

(4) गोपेश्वर मेला – घाटोल ( बांसवाड़ा )
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

अलवर के मेले –

(1) नारायणी का मेला – बरवा डूंगरी ( अलवर )
यह मेला वैशाख शुक्ल एकादशी को भरता है।

(2) चंद्रप्रभु मेला – तिजारा ( अलवर )
यह मेला फाल्गुन शुक्ल सप्तमी तथा श्रावण सप्तमी को भरता है।

(3) भर्तृहरि मेला – अलवर
यह मेला भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को भरता है।

(4) पांडुपोल मेला – पांडुपोल ( अलवर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी व पंचमी को भरता है।

(5) धोलागढ़ देवी का मेला – बहुतुकला ( अलवर )
यह मेला वैशाख शुक्ल एकम से पूर्णिमा तक भरता है।

(6) गिराधारी दाल का मेला – बानसूर ( अलवर )
यह मेला चैत्र शुक्ल द्वादशी को भरता है।

(7) बिलारी माता का मेला – अलवर
यह मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी को भरता है।

(8) जगन्नाथजी मेला – अलवर
यह मेला प्रतिवर्ष आश्विन शुक्ल अष्टमी से त्रयोदशी तक भरता है।

भरतपुर के मेले –

(1) भोजन थाली मेला – कामां ( भरतपुर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को भरता है।

(2) गंगा दशहरा मेला – कामां ( भरतपुर )
यह मेला ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी को भरता है।

(3) ब्रज यात्रा मेला – डिग ( भरतपुर )
यह मेला माघ कृष्ण द्वादशी से माघ शुक्ल पंचमी तक भरता है।

(4) बजरंग पशु मेला – बजरंग ( भरतपुर )
यह मेला अश्विन शुक्ल द्वितया से अष्टमी तक भरता है।

(5) जसवंत पशु मेला – भरतपुर
यह मेला आश्विन शुक्ल पंचमी से पूर्णिमा तक भरता है।

(6) गरुड़ मेला – बंशी पहाड़पुर ( भरतपुर )
यह मेला कार्तिक शुक्ल तृतीय को भरता है।

(7) हीरामन बाबा मेला – नगला जहाज ( भरतपुर )
यह मेला भाद्रपद व वैशाख शुक्ल चतुर्थी तक भरता है।

(8) बसंती पशु मेला – रूपवास ( भरतपुर )
यह मेला माघ अमावस्या से शुक्ल पंचमी तक भरता है।

बीकनर के मेले –

(1) कपिल मुनि मेला – कोलायत ( बीकानेर )
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

(2) चनणी चेरी मेला – देशानोक ( बीकानेर )
यह मेला फाल्गुन शुक्ल सप्तमी को भरता है।

(3) जम्भेश्वर मेला – मुकाम ( बीकानेर )
यह मेला फाल्गुन व आश्विन अमावस्या को भरता है।

(4) करणी माता का मेला – देशानोक ( बीकानेर )
यह मेला चैत्र व आश्विन के नवरात्रों में भरता है।

चुरु के मेले –

(1) गोगाजी का मेला – ददरेवा ( चुरू)
यह मेला भाद्रपद कृष्ण नवमी को भरता है।

(2) सालासर हनुमान जी का मेला – सालासर, सुजानगढ़ (चुरू)
यह मेला चैत्र पूर्णिमा को भरता है।
यह केवल एकमात्र ऐसे बालाजी जिसकी दाढ़ी – मूछ वाली मूर्ति है।

(3) श्याम पांडिया का मेला – तारानगर ( चुरू)
यह मेला भाद्रपद अमावस्या को भरता है।

(4) साहवा गुरुद्वारा मेला – साहवा, तारानगर ( चुरू)
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।
यह मेला राजस्थान के सिक्खों का सबसे बड़ा मेला है।

बूंदी के मेले –

(1) कजली तीज मेला – बूंदी
यह मेला भाद्रपद कृष्ण तृतीया को भरता है।

(2) बीजासण माता मेला – इंद्रगढ़ ( बूंदी)
यह मेला नवरात्रों में भरता है।

भीलवाड़ा के मेले –

(1) फूलडोल मेला – शाहपुरा (भीलवाड़ा )
यह मेला चैत्र एकम से पंचमी तक भरता है।

(2) सवाई भोज मेला – आसींद ( भीलवाड़ा )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को भरता है।

(3) तिलस्वा महादेव मेला – तिलस्वा, मांडलगढ़ (भीलवाड़ा )
यह मेला फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी (महाशिवरात्रि ) को भरता है।

(4) धनोप माता का मेला – घनोप (भीलवाड़ा)
यह मेला चैत्र शुक्ल एकम से दशमी तक भरता है।

जयपुर के मेले –

(1) बाणगंगा का मेला – विराटनगर ( जयपुर )
यह मेला वैशाख पूर्णिमा को भरता है।

(2) शीतला माता का मेला – चाकसू ( जयपुर )
यह मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी को लगता है।

(3) संत दादू का मेला – नारायणा ( जयपुर)
यह मेला आश्विन शुक्ल नवमी को भरता है।

(4) तीज का मेला – जयपुर
यह मेला श्रावण शुक्ल तृतीय को भरता है।

(5) गणगौर का मेला – जयपुर
यह मेला चैत्र शुक्ल तृतीया को लगता है।

धौलपुर के मेले –

(1) तीर्थ राज मेला – मचममुंड ( धौलपुर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को लगता है।

(2) बाबू महाराज मेला – सैपाऊ ( धौलपुर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भरता है।

(3) महादेव मेला – सैंपऊ (धौलपुर )
यह मेला फाल्गुन व श्रावण चतुर्दशी को भरता है।

गंगानगर के मेले –

(1) पंपाराम का मेला – विजनगर ( गंगानगर )
यह मेला फाल्गुन को दिन तक भरता है।

(2) बुढ्डा जोहड़ का मेला – राजासिंहनगर ( गंगानगर )
यह मेला श्रावण अमावस्या को भरता है।

(3) गणगौर मेला – गंगानगर
यह मेला चैत्र शुक्ल तृतीया को भरता है।

चित्तौड़गढ़ के मेले –

(1) जौहर मेला – चित्तौड़गढ़ दुर्ग में
यह मेला चैत्र शुक्ल एकादशी को भरता है।

(2) दशहरा मेला – निंबाहेडा ( चित्तौड़गढ़ )
यह मेला आश्विन शुक्ल एकम से दशमी को भरता है।

(3) मीरा महोत्सव – चित्तौड़गढ़
यह मेला आश्विन पूर्णिमा ( शरद पूर्णिमा ) को भरता है।

(4) सांवलियाजी मेला – बड़ी सादड़ी ( चित्तौड़गढ़ )
यह मेला चैत्र शुक्ल दशमी को भरता है।

(5) मातृकुंडिया मेला – राशमी ( चित्तौड़गढ़ )
यह मेला वैशाख पूर्णिमा को भरता है।

डूंगरपुर के मेले –

(1) वेणेश्वर मेला – नेवटपर ( डूंगरपुर )
यह मेला माघ पूर्णिमा को भरता है।
यह मेला सोम,माही,जाखाम नदी के संगम पर भरता है।
इसको आदिवासियों का कुम्भ कहते है।

(2) नीलापानी मेला – डूंगरपुर
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

(3) बीजवा माता का मेला – रामादेवरा ( डूंगरपुर)
यह मेला चैत्र कृष्ण सप्तमी को भरता है।

(4) हड़मतिया मेला – डूंगरपुर
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

(5) गलियाकोट का उर्स – डूंगरपुर
यह मेला मोहर्रम की 27 तारीख को भरता है।
यह उर्स राजस्थान के दाऊदी बोहरा संप्रदाय का सबसे बड़ा उर्स है।

सवाई माधोपुर के मेले –

(1) शिवरात्रि मेला – शिवाड़ ( सवाई माधोपुर )
यह मेला फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को भरता है।

(2) गणेशजी का मेला – रणथंभौर दुर्ग में
यह मेला भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भरता है।

(3) रामेश्वर घाट का मेला – त्रिवेणी रामेश्वर (सवाई माधोपुर )
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।
(4) चौथ माता का मेला – चौथ का बड़वाड़ा ( सवाई माधोपुर )
यह मेला माघ की कृष्ण चतुर्थी को भरता है।

(5) चमत्कारजी मेला – आलनपुर ( सवाई माधोपुर )
यह मेला शरद पूर्णिमा को भरता है।

सीकर के मेले –

(1) जीण माता का मेला – रेवासा ( सीकर )
यह मेला नवरात्र में लगता है।

(2) खाटूश्यामजी का मेला –
यह मेला फाल्गुन शुक्ल एकादशी तथा बारस को भरता है।

(3) शाकंभरी माता का मेला – उदयपुरवाटी
यह मेला नवरात्र में भरता है।

बारां के मेले –

(1) सीताबाड़ी का मेला – सीताबाड़ी, केलवाड़ा ( बारां)
यह मेला ज्येष्ठ अमावस्या को भरता है।
इस मेले को सहारियों का कुंभ कहा जाता है।

(2) फूलडोल मेला – किशनगंज ( बारां )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भरता है।
यह राजस्थान का दूसरा फूलडोल मेला है।
प्रथम फूलडोल मेला राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में भरता है।

हनुमानगढ़ के मेले –

(1) भद्रकाली मेला – हनुमानगढ़
यह मेला नवरात्र में लगाता है।

(2) गोगामेड़ी मेला – गोगामेड़ी, नोहर ( हनुमानगढ़ )
यह मेला भाद्रपद कृष्ण नवमी को भरता है।

(3) ब्रह्माणी माता का मेला – पाल्लू, रावतसर ( हनुमानगढ़ )
यह मेला नवरात्र मे भरता है।

राजसमंद के मेले –

(1) अन्नकूट मेला – नाथद्वारा ( राजसमंद)
यह मेला कार्तिक शुक्ल एकम को भरता है।

(2) देवझुलनी मेला – चारभूज ( राजसमंद )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भरता हैं।

(3) हल्दीघाटी मेला – हल्दीघाटी ( राजसमंद )
यह मेला 21 को भरता है।

(4) जन्माष्टमी मेला – नाथद्वारा ( राजसमंद )
यह मेला भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को भरता है।

दौसा के मेले –

(1) गणगौर मेला – लालसोट ( दौसा )
यह मेला चैत्र शुक्ल तृतीया को भरता है।

(2) बीजासणी का मेला – लालसोट ( दौसा)
यह मेला चैत्र पूर्णिमा को भरता है।

(3) बसंत पंचमी मेला – दौसा
यह मेला माघ पंचमी को भरता है।

(4) मेहंदीपुर बालाजी का मेला – मेहंदीपुर ( दौसा )
यह मेला चैत्र पूर्णिमा को भरता है।

(5) श्री रामापुरा मेला – बसवा ( दौसा)
यह मेला भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को भरता है।

प्रतापगढ़ का मेला –

(1) गौतमेश्वर मेला – अरणोद ( प्रतापगढ़)
यह मेला वैशाख पूर्णिमा को भरता है।

करौली के मेले –

(1) शिवरात्रि पशु मेला – करौली
यह मेला फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को भरता है।

(2) महावीरजी का मेला – करौली
यह मेला चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को भरता है।

(3) केलादेवी मेला – करौली
यह मेला चैत्र शुक्ल अष्टमी को भरता है।

उदयपुर के मेले –

(1) विक्रमादित्य मेला – उदयपुर
यह मेला चैत्र अमावस्या को भरता है।

(2) गणगौर मेला – उदयपुर
यह मेला चैत्र शुक्ल तृतीया को भरता है।

(3) ऋषभदेव मेला – उदयपुर
यह मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी व नवमी को भरता है।

(4) एकलिंगजी का मेला – कैलाशपुरी ( उदयपुर )
यह मेला फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को भरता है।

टोंक के मेले –

(1) कल्याणजी का मेला – डिग्गी, टोंक
यह मेला श्रावण अमावस्या, वैशाख पूर्णिमा तथा भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भरता है।

जैसलमेर के मेले –

(1) पर्यटन मरू मेला – जैसलमेर
यह मेला माघ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक भरता है।

(2) बाबा रामदेव मेला – रामदेवरा, रुणिचा ( जैसलमेर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल द्वितीय से एकादशी तक भरता है।

(3) चुंघी तीर्थ मेला – जैसलमेर
यह मेला भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को भरता है।

कोटा के मेले –

(1) दशहरा मेला – कोटा
था मेला आश्विन शुक्ल दशमी को लगता है।
इस मेले को सबसे पहले प्रारम्भ उम्मेदसिंह ने किया था।

झुंझुनूं के मेले –

(1) नरहड़ के पीर का मेला – नरहड़, झुंझुनूं
यह मेला भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को लगता है।

(2) राणी सती का मेला – झुंझुनूं
यह मेला भाद्रपद अमावस्या को लगता है।

(3) रामदेवजी का मेला – नवलगढ़ ( झुंझुनूं )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल दशमी को लगता है।

(4) मानस माता का मेला – झुंझुनूं
यह मेला चैत्र व आश्विन शुक्ल अष्टमी को लगता है।

जालौर के मेले –

(1) आशापुरा माता का मेला – मोदरा ( जालौर )
यह मेला चैत्र कृष्ण एकम को लगता है।

(2) शिवरात्रि मेला – जालौर
यह मेला फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को भरता है।

(3) सुंधा माता का मेला – दांतलावास ( जालौर )
यह मेला वैशाख व भाद्रपद त्रयोदशी से पूर्णिमा तक भरता है।

(4) शीतला माता का मेला – जालौर
यह मेला चैत्र शुक्ल सप्तमी को भरता है।

(5) सेवाड़िया मेला – रानीवाड़ा ( जालौर )
यह मेला चैत्र शुक्ल एकादशी को भरता है।

जोधपुर के मेले –

(1) चामुंडा माता का मेला – मेहरानगढ़ ( जोधपुर )
यह मेला चैत्र व आश्विन शुक्ल नवमी को लगता है।

(2) रामदेवजी का मेला – मसूरिया ( जोधपुर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल द्वितीय को भरता है।

(3) नागपंचमी मेला – मंडोर ( जोधपुर )
यह मेला भाद्रपद शकएल पंचमी को भरता है।

(4) खेजाडली वृक्ष मेला – खेजाडली ( जोधपुर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल दशमी को भरता है।

(5) विरपुरी मेला – मंडौर ( जोधपुर )
यह मेला श्रावण के अंतिम सोमवार को भरता है।

झालावाड़ के मेले –

(1) नवरात्रा मेला – चौमहला ( झालावाड़ )
यह मेला चैत्र व आश्वानी नवारत्रें में भरता है।

(2) शिवरात्रि मेला – मनेहराथाना, भवानी मंडी ( झालावाड़ )
यह मेला फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को लगता है।

(3) गोमतीसागर पशु मेला – झालरापाटन ( झालावाड़ )
यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को लगता है।

(4) बसंत पंचमी मेला –
यह मेला बसंत पंचमी को भरता है।

पाली के मेले –

(1) परशुराम महादेव का मेला – देसूरी ( पाली )
यह मेला श्रावण शुक्ल षष्टी – सप्तमी को भरता है।

(2) शीतला माता का मेला – सोजत ( पाली )
यह मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी को भरता है।

(3) दशहरा मेला – बाली ( पाली )
यह मेला आश्विन शुक्ल दशमी को भरता है।

(4) वरकाना मेला – वरकाना ( पाली )
यह मेला पौष शुक्ल दशमी को भरता है।

(5) रामदेवजी मेला – रायपुर ( पाली )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भरता है।

(6) नींबो जे का नाथ मेला – फलाना ( पाली)
यह मेला वैशाख पूर्णिमा को भरता है।

(7) चोटिला पीर दुलेशाह का मेला – हजरत की मजार पर ( पाली )
यह मेला वैशाख शुक्ल सप्तमी तथा कार्तिक कृष्ण एकम को भरता है।

(8) सोनड़ा खेतलाजी का मेला – सोनड़ा ( पाली )
यह मेला चैत्र शुक्ल एकम को लगता है।

सिरोही के मेले –

(1) ऋषिकैश महादेव मेला – उमरनी ( सिरोही )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भरता है।

(2) गौर मेला – सियावा ( सिरोही )
यह मेला वैशाख शुक्ल चतुर्थी को भरता है।

(3) शीतला माता का मेला – सिरोही
यह मेला चैत्र कृष्ण सप्तमी को भरता है।
(4) गौतमजी का मेला – शिवगंज ( सिरोही )
यह मेला चैत्रशुक्ल त्रयोदशी को लगता है।

(5) सारणेश्वर पशु मेला – सिरोही
यह मेला भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से दशमी तक भरता है।

(6) सारणेश्वर महादेव मेला – सारणेश्वर दुर्ग ( सिरोही )
यह मेला बद्रपद शुक्ल बारस को लगता है।

नागौर के मेले –

यहां पर राजस्थान के सार्वधिक पशु मेले लगते है।

(1) बलदेव पशु मेला – मेडातासिटी (नागौर )
यह मेला चैत्र कृष्ण एकम से पूर्णिमा तक भरता है।

(2) तेजाजी पशु मेला – परबतसर ( नागौर )
यह मेला भाद्रपद शुक्ल दशमी से पूर्णिमा तक भरता है।
यह मेला राजस्थान का आय की दृष्टि से सबसे बड़ा मेला है।

(3) बाबा रामदेव पशु मेला – नागौर
यह मेला माघ शुक्ल एकम से पूर्णिमा तक भरता है।

(4) दाधिमति माता का मेला – गोठ मंगलोद ( नागौर )
यह मेला चैत्र व आश्विन नवरात्रे में भरता है।

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