- राजस्थान की जीवन रेखा / मरूगंगा कहा जाता है।
- पहले इसका नाम राजस्थान नहर था।
- 2 नवम्बर 1984 को इसका नाम इन्दिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया है।
- बीकानेर के इंजीनियर कंवर सैन ने 1948 में भारत सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन पेश किया IGNP का मुख्यालय (बोर्ड) जयपुर में है।
- इस नहर का निर्माण का मुख्य उद्ददेश्य सतलुज-व्यास नदियों के जल से राजस्थान को आवंटित 86 लाख एकड़ घन फीट जल को उपयोग में लेना है।
- हरि कै बैराज से बाड़मेर के गडरा रोड़ तक नहर बनाने का लक्ष्य रखा गया। जिससे श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर को जलापूर्ति हो सके।
नहर निर्माण कार्य का उद्घाटन तात्कालिक ग्रहमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत ने 31 मार्च 1958 को किया ।
- फीडर नहर की लंबाई 204 किलोमीटर तथा मुख्य नहर की लंबाई 445 किलोमीटर इंदिरा गांधी नहर की कुल लंबाई 649 किलोमीटर है।
राजस्थान में प्रवेश – राजस्थान फीडर नहर का हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील के खःरखेड़ा गांव के निकट व अंतिम
इंदिरा गांधी नहर उद्गम – पंजाब राज्य के फिरोजपुर शहर से व्यास व सतलुज नदी के संगम पर हरिके बैराज नामक बांध IGNP के दो भाग हैं। प्रथम भाग राजस्थान फीडर कहलाता है इसकी लम्बाई 204 कि.मी. (170 कि.मी. पंजाब व हरियाणा + 34 कि.मी. राजस्थान ) है।
गंतव्य स्थान हनुमानगढ़ जिले की मसीतावाली हेड तक इंदिरा गांधी नहर का निर्माण दो चरण में
प्रथम चरण राजस्थान फीडर नहर हरिके बैराज से मसीतावाली हनुमानगढ़ तक 204 किलोमीटर, राजस्थान में 34
द्वितीय चरण इस चरण में 1998 से चारागाह विकास कार्यक्रम जापान की OECF संस्था के आर्थिक सहयोग से चलाया जा रहा है।
किलोमीटर हरियाणा में 20 किलोमीटर पंजाब में 150 किलोमीटर
मुख्य नहर हनुमानगढ़ से दातोर- पुंगल बीकानेर 189 किलोमीटर
प्रारंभ में बीकानेर से मोहनगढ़ – जैसलमेर तक 256 किलोमीटर बाद में मोहनगढ़ जैसलमेर से गडरा रोड जीरो पॉइंट बाड़मेर तक 165 किलोमीटर
इंदिरा गांधी नहर से राजस्थान राज्य का 16.17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र स्थित है।
इंदिरा गांधी नहर पर लिफ्ट
1. गंधेली (नोहर) साहवा लिफ्ट- चोधरी कुम्भाराम लिफ्ट नहर बीकानेर, हनुमानगढ़, चुरू, झुंझुनू सर्वाधिक जिलों में विस्तृत
2. बीकानेर – लुणकरणसर लिफ्ट कंवरसेन लिफ्ट नहर श्री गंगानगरबीकानेर सबसे लंबी लिफ्ट नहर इंदिरा गांधी नहर पर प्रथम लिफ्ट 151.64 km
3. गजनेर लिफ्ट नहर – पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर बीकानेर नागौर इससे निकलने वाली कानासर वितरिका द्वारा नागौर जिले व बीकानेर के कोलायत व नोखा के कुछ गांवों को पानी दिया जाता है।
4. बांगड़सर लिफ्ट नहर – वीर तेजाजी लिफ्ट नहर (भैरूंदान छालानी) बीकानेर सबसे छोटी लिफ्ट नहर
5. कोलायत लिफ्ट नहर -डा. करणी सिंह लिफ्ट नहर बीकानेर जोधपुर
6. फलौदी लिफ्ट नहर गुरू जम्भेश्वर जलो उत्थान योजना जोधपुर, बीकानेर जैसलमेर
7. पोकरण लिफ्ट नहर -जयनारायण व्यास लिफ्ट जैसलमेर जोधपुर
IGNP की 9 शाखाएं है
1. रावतसर हनुमानगढ़)
यह IGNP की प्रथम शाखा है जो एक मात्र ऐसी शाखा है जो नहर के बांयी ओर से निकलती है। – श्री गंगानगर
2. सुरतगढ़
3. अनूपगढ़ – गंगानगर तथा बीकानेर जैसलमेर जिले में विस्तृत – बीकानेर
4. पुगल
5. चारणवाला-बीकानेर तथा जैसलमेर जिले में विस्तृत
6. दातौर
7. बिरसलपुर – जैसलमेर
8. शहीद बीरबल
9सागरमल गोपा
गडरारोड उपशाखा – यह शहीद सागरमल गोपा शाखा से निकलती है इसका नाम पहले बरकतुल्लाह खान शाखा था अब बाबा रामदेव शाखा के नाम से जानी जाती है लीलवा दीघाह उपशाखा मोहनगढ़ जैसलमेर से निकलती है।
- इंदिरा गांधी नहर की सर्वाधिक लिफ्ट नहर में शाखाएं बीकानेर में अवस्थित है।
- इंदिरा गांधी नहर से सर्वाधिक सिंचाई बीकानेर जिले में होती है।
- नहरों से सर्वाधिक सिंचाई श्रीगंगानगर जिले में होती है।
- इंदिरा गांधी नहर परियोजना से 10 जिले लाभान्वित है।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना की प्रमुख पेयजल परियोजना
- कंवरसेन लिफ्ट परियोजना प्रारंभिक नाम बीकानेर लूणकरणसर लिफ्ट नहर योजना था।
- प्रथम चरण में इसका निर्माण किया गया या लिफ्ट नहर मुख्य नहर के बिर्धवाल हेड से निकाली गयी। 1989 में इसका नाम परिवर्तित किया गया। 1976 में यह परियोजना पूर्ण हुई इसके द्वारा बीकानेर शहर की जल पूर्ति की जाती है। तथा जल को संचित रखने के लिए बिछवाल जलाशय मे करा गया।
- यह बीकानेर की जीवन रेखा है।
- राजीव गांधी लिफ्ट नहर -जोधपुर जिले के जल आपूर्ति हेतु / जोधपुर की जीवन रेखा
- आपणी योजना- गंधेली साहब परियोजना हनुमानगढ़, चूरू व झुंझुनूं जिलों को जलापूर्ति यह स्कीम जर्मन के सहयोग से पूरी की गई। इसके प्रथम चरण में चूरू व हनुमानगढ़ जिले व द्वितीय चरण में चूरू व झुंझुनूं जिले के गांव को पेयजल उपलब्ध कराया गया
इंदिरा गांधी नहर का महत्त्व
- सिंचाई सुविधा
- कृषि उत्पादन में वृद्धि
- किसानों का आर्थिक विकास
- वनस्पति में वृद्धि मरुस्थलीकरण में कमी
- सूरतगढ़, रामगढ़, गिरल, बरसिंगसर जैसी ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जल की प्राप्ति
- औद्योगिक क्षेत्रों को जल की उपलब्धता
इंदिरा गांधी नहर की समस्याएं
- जल रिसाव व अधिक सिंचाई के कारण सेम की समस्या
- लवणीय भूमि की समस्या
- जवाई बांध पाली जिले में जवाई नदी पर अवस्थित बांध हैजवाई परियोजना के द्वारा पाली, जालौर जिले में सिंचाई तथा पाली जिले में पेयजल आपूर्ति की जाती हैयह पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी परियोजना हैइसे मारवाड़ का अमृत सरोवर कहते हैंपानी की कमी होने पर इस बांध में सेई नदी के द्वारा अतिरिक्त जल डाला जाता है
- सेई जल परियोजना राजस्थान राज्य की पहली सुरंग जल परियोजना है
- जसवंत सागर बांध जोधपुर लूनी नदी पर अवस्थित
- बनास बांध सिरोही- पश्चिमी बनास नदी पर
- गोकुलभाई भट्ट बांध – सिरोही पश्चिमी बनास नदी पर अवस्थित
माही बजाज सागर बांध –
बोरखेड़ा गांव बांसवाड़ा राजस्थान राज्य का सबसे लंबा बांध राजस्थान की सबसे बड़ी बांध परियोजना जनजाति क्षेत्र की सबसे बड़ी बांध परियोजना राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र को इसके द्वारा विद्युत आपूर्ति की जाती हैयहां पर कुल 140 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया जाता हैराजस्थान व गुजरात के सहयोग से 45: 55 इस परियोजना में 3 बांधों का निर्माण करा गया है
- माही बजाज सागर बांध आदिवासी क्षेत्र में सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना राजस्थान की सबसे लंबी बांध परियोजना यह 1 नवंबर 1983 को राष्ट्र को समर्पित किया गया
- बोरखेड़ा बांध बांसवाड़ा
- कागदी पिकप बांध – बांसवाड़ा इससे दो नेहरे निकलती हैं भीखाभाई सागवाड़ा नहर, आनंदपुरी नहर भीखाभाई सागवाड़ा नहर से डूंगरपुर जिला लाभान्वित होता है
- कडाणा बांध यह गुजरात में अवस्थित बांध हैइस परियोजना के अंतर्गत बांसवाड़ा में दो जल विद्युत केन्द्र है जिन से 140 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता है तथा 100% विरुद्ध राजस्थान के द्वारा उपयोग में ली जाती है
- जिसके द्वारा संपूर्ण विद्युत राजस्थान राज्य के द्वारा उपयोग में ली जाती हैजाखम बांध परियोजना प्रतापगढ़ राज्य का सबसे ऊंचा बांध
- नंदसमंद परियोजना – राजसमंद बनास नदी पर अवस्थित
- बाघेरी का नाका – राजसमंद
- मातृकुंडिया बांध – चित्तौड़गढ़
- मेजा बांध भीलवाड़ा- कोठारी नदी पर अवस्थित
- बीसलपुर बांध टोंक बनास नदी पर अवस्थित
- ईसरदा बांध- सवाईमाधोपुर बनास नदी पर अवस्थित
- मोरेल बांध – दोसा- मोरेल नदी पर अवस्थित
- मानसी वाकल परियोजना- उदयपुर
- इस परियोजना का निर्माण राजस्थान सरकार व हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के द्वारा किया गया है
- हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड द्वारा 70%, राजस्थान सरकार द्वारा 30% राशि अनुदानित है। यह उदयपुर जिले के लिए पेयजल परियोजना है
भाखड़ा नांगल परियोजना
- सतलज नदी पर अवस्थित हैव्यास व सतलज नदी का जल प्राप्त होता हैभाखड़ा नांगल परियोजना भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियाजना हैपंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश की संयुक्त परियोजना है
- राजस्थान का हिस्सा 15.2 प्रतिशत है
- हिमाचल प्रदेश का हिस्सा केवल जल विधुत के उत्पादन में ही है
- सर्वप्रथम पंजाब के गर्वनर लुईस डैन ने सतलज नदी पर बांध बनाने का विचार प्रकट किया
- इस बांध का निर्माण 1946 में प्रारम्भ हुआ एवं 1962 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया गयायह भारत का सबसे ऊंचा बांध है।
- भाखड़ा बांध के जलाशय का नाम गोबिन्द सागर है
- इस परियोजना के अन्तर्गत राजस्थान राज्य का 2.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र लाभान्वित है
भाखड़ा बांध
इसका निर्माण सतलज नदी पर भाखड़ा नामक स्थान पर किया गया हैइसका जलाशय गोविन्द सागर हैइस बांध को देखकर पंजवाहरलाल नेहरू ने इसे चमत्कारिक विराट वस्तु की संज्ञा दी और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को आधुनिक भारत का मन्दिर कहा है।
नांगल बांध
यह बांध भाखड़ा से 12 किमीनीचे एक घाटी में बना है इससे 64 कि.मीलम्बी नहर निकाली गई है जो अन्य नहरों को जलापूर्ति करती है
भाखड़ा मुख्य नहर- सर्वाधिक लाभान्वित हनुमानगढ़
यह पंजाब के रोपड़ से निकलती है यह हरियाणा के हिसार के लोहाणा कस्बे तक विस्तारित हैइसकी कुल लम्बाई 175 कि.मी है
इस परियोजना में सरहिन्द नहरसिरसा नहर, नरवाणा नहरबिस्त दोआब नहर निकाली गई हैइस परियोजना से राजस्थान के श्री गंगानगर व हनुमानगढ़, चुरू जिलों को जल व विधुत एवं श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, चुरू, झुझुनू, सीकर, बीकानेर को विधुत की आपूर्ति होती है
परियोजना के अंतर्गत राजस्थान राज्य का हिस्सा 15.22 प्रतिशत जिसमें राज्य को जल तथा विद्युत दोनों प्राप्त होंगे
इस परियोजना में राज्य 233.52 मेगावाट विद्युत वह 2.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध प्राप्त करता है
रावी व्यास परियोजना
पंजाब, हरियाणा व राजस्थान की संयुक्त परियोजना
- सतलज, रावी-व्यास नदी का जल
- इस परियोजना के अंतर्गत व्यास नदी पर दो बांध बनाए गए हैं
- पंडोह बांध हिमाचल प्रदेश के पंदोह नामक स्थान पर
- बांध पर 990 मेगावाट विद्युत का उत्पादन होता है
- जिसमें राजस्थान राज्य 198 मेगावाट 20% विद्युत प्राप्त करता है
- पोंग बांध दूसरी इकाई में व्यास नदी पर बांध का निर्माण कराया गया है
- जिसके द्वारा पंजाबहरियाणा व राजस्थान में सिंचाई होती है
- रावी व्यास परियोजना के अंतर्गत राजस्थान को सर्वाधिक जल पोंग बांध से प्राप्त होता है
- शीत ऋतु में इंदिरा गांधी नहर परियोजना में पोंग बांध के द्वारा जलापूर्ति की जाती हैपोंग बांध से राज्य को 233.4 मेगावाट 59% विद्युत प्राप्त होती है
सिद्धमुख नोहर परियोजना
- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान की संयुक्त परियोजना
- इसका नाम अब राजीव गांधी नोहर परियोजना है
- इसका शिलान्यास 5 अक्टुबर 1989 को राजीव गांधी ने भादरा के समीप भिरानी गांव से किया
- रावी-व्यास नदियों के अतिरिक्त जल का उपयोग में लेना हैइसके लिए भाखड़ा मुख्य नहर से 275 कि.मीलम्बी एक नहर निकाली गयी है।
- इससे नोहरभादरा (हनुमानगढ़)तारानगर, सहवा (चुरू) तहसिलों को लाभ मिल रहा है।
गुड़गांव नहर
- हरियाणा व राजस्थान की संयुक्त नहर
- इस नहर के निर्माण का मुख्य उद्देश्य मानसूनकाल में यमुना नदी के अतिरिक्त जल को उपयोग लाना है
- 1966 मे इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ एवं 1985 में पुरा हो गया
- यह नहर यमुना नदी में उत्तरप्रदेश के आँखला से निकाली गई है
- यह भरतपुर जिले की कामा तहसील के जुरेरा (जुटेरा) गांव में राजस्थान में प्रवेश करती है
- इससे भरतपुर की कामा व डींग तहसील की जलापूर्ति होती है
- इसकी कुल लम्बाई 58 कि.मीहै
- इसे यमुना लिंक परियोजना कहते हैं
गंगनहर
- गंग नहर भारत की पहली पक्की नहर मानी जाती है
- यह राजस्थान की पहली बहुउद्देशीय परियोजना है
- श्रीगंगानगर जिला इस नहर से सर्वाधिक लाभान्वित जिला है
- यह भारत की प्रथम नहर सिंचाई परियोजना है
- बीकानेर के महाराजा गंगासिंह (इन्हें आधुनिक भारत का भागीरथ कहा जाता है) के प्रयासों से गंगनहर के निर्माण द्वारा सतलज नदी का पानी राजस्थान में लाने हेतु 4 दिसम्बर 1920 को बीकानेर, भावलपुर और पंजाब राज्यों के बीच सतलज नदी घाटी समझौता हुआ था
- गंगनहर की आधारशिला फिरोजपुर हेडबाक्स पर 5 सितम्बर 1921 को महाराजा गंगासिंह द्वारा रखी गई।
- सतलज नदी से पंजाब के फिरोजपुर के हुसैनीवाला से निकाली गई है
- श्री गंगानगर के सखा गांव में यह राजस्थान में प्रवेश करती है
- मुख्य नहर की लम्बाई 129 कि.मीहै(112 कि. मी. पंजाब 17 कि.मीराजस्थान) फिरोजपुर से शिवपुर हैड तक हैलक्ष्मीनारायण जी, लालगढ़, करणीजी, समीजा, श्यामल इसकी मुख्य शाखा हैनहर में पानी के नियमित बहाव और नहर के मरम्मत के समय इसे गंगनहर लिंक से जोड़ा गया हैयह लिंक नहर व हरियाणा में लोहागढ़ इंदिरा गांधी नहर से निकाली गई हैऔर श्रीगंगानगर के साधुवाली गांव में गंगनहर से जोड़ा गया है
लखवार डैम परियोजना
- राज्य उत्तर प्रदेशराजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के द्वारा किया जाएगा
- इस परियोजना से सभी राज्यों को पानी की समस्या का समाधान प्राप्त होगा इस परियोजना को 1976 में योजना आयोग के
- द्वारा मंजूरी प्रदान कर दी गई थी
- 1986 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मंजूरी प्रदान की गई
- वर्ष 2008 में यह परियोजना राष्ट्रीय परियोजना घोषित की गई
- लखवाड़ परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड में देहरादून जिले के लोहारी गांव के नजदीक यमुना नदी पर बांध बनाया जाएगा
- इस परियोजना में 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा जो उत्तराखंड को प्राप्त होगी तथा अन्य राज्य को सिंचाई हेतु प्राप्ति होगी
रेणुकाजी डेम परियोजना
- दिल्ली, हरियाणा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल और राजस्थान की बहुउद्देशीय परियोजना
- यह डैम यमुना और उसकी सहायक नदियां गिरी और टोंस नदी पर बनाया जाएगा यह एक राष्ट्रीय परियोजना है
- हिमाचल के सिरमौर जिले में गिरी नदी पर जल का भंडारण किया जाएगा
- इस परियोजना पर 40 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा
मरुस्थलीय क्षेत्र के लिए राजस्थान जल क्षेत्र पुनर्गठन परियोजना (RWSRPD)
- इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण के पुनर्गठन के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा वित्त पोषण प्रदान किया गयाइस परियोजना का लाभ श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, झुंझुनूसीकरनागौर, जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर
राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना
- राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना को जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी द्वारा वित्त पोषित है
- जायका परियोजना को दो चरणों में वित्त पोषित करेगा परियोजना के तहत 27 जिलों में 137 सिंचाई परियोजना के पुनर्वास एवं जीर्णोद्धार का कार्य किया जाना है।
- परियोजना के क्रियान्वयन से 4.70 लाख हेक्टर सिंचित क्षेत्र के किसान लाभान्वित होंगे > प्रथम चरण के अंतर्गत 21 जिलों में परियोजना को लागू किया जाएगा यह परियोजना अप्रैल 2017 से प्रभावी है और मार्च 2025 तक पूर्ण होने का लक्ष्य
राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना
- यह परियोजना जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभागभारत सरकार विश्व बैंक परियोजना द्वारा वित्त पोषित है
- इस परियोजना में 100% अनुदान भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया है
- इस योजना की अवधि 8 वर्ष 2016-17 से 2023-24 है
- राज्य भर में 147 स्वचालित वर्षा मापी 112 स्वचालित बांध गेज संयंत्र स्थापित किए जाएंगे
- इन उपकरणों की मदद से सेटेलाइट द्वारा सटीक डाटा प्राप्त किए जा सकते हैं जोकि जल प्रबंधन में सुधार लाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
- पारदर्शी जल प्रबंधन हेतु बांध और नहर प्रणाली के लिए सर्वप्रथम बीसलपुर बांध पर (स्काडा) सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एग्जीबिशन प्रणाली को स्थापित किया जा चुका है।
- इस क्रम में गुड्डा बांध-बूंदी, जवाई बांध- पाली, नर्मदा नहर परियोजना-सांचौर, गंग नहर तथा भाखड़ा नहर श्री गंगानगर, हनुमानगढ़ की नहर पर स्काडा सिस्टम स्थापित किए जाएंगे
अटल भू- जल परियोजना
- भारत सरकार तथा विश्व बैंक के सहयोग से 50:50
- भारत के 7 राज्य हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश
- कम होते हुए भू-जल स्तर को रोकने के लिए यह परियोजना 1 अप्रैल 2020 से लागू की गई।
- इस परियोजना का कार्यकाल 5 वर्षों का है
- इस योजना के अंतर्गत राजस्थान राज्य के 17 जिलों की 38 पंचायत समिति के 1144 पंचायतों को चिन्हित किया गया है।
इंदिरा गांधी फीडर – सरहिंद फीडर
इंदिरा गांधी फीडर सरहिंद फीडर की री लाइनिंग के लिए 23 जनवरी 2019 को भारत सरकार और पंजाब सरकार के साथ अनुबंध हस्ताक्षर किए गए इसमें 60% राशि केंद्र द्वारा प्रदान की जाएगी तथा 40% राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी
सरहिंद फीडर की रिलाइनिंग के लिए पंजाब व राजस्थान के मध्य से 54.15% व 45.8% अंशदान होगाराजस्थान राज्य को 60% राशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी
- गरड्दा सिंचाई परियोजना मांगली डूंगरी नदी में गणेश नाला पर बूंदी जिले में
- तकली सिंचाई परियोजना तकली नदी पर कोटा जिले में
- गागरिन सिंचाई परियोजना आहु नदी पर झालावाड़ जिले में ल्हासी सिंचाई परियोजना ल्हासी नदी पर बारां जिले में
- हथियादेह सिंचाई परियोजना-बारां जिले में
- चवली परियोजना – झालावाड़
- भीमसागर परियोजना झालावाड़
- छापी परियोजना- झालावाड़
- कालीसिंध परियोजना – झालावाड़
- गागरिन परियोजना – झालावाड़
- पीपलाद परियोजना- झालावाड़
- मनोहर थाना परियोजना झालावाड़
- रामगढ़ परियोजना – झालावाड़
चंबल घाटी परियोजना
- यह परियोजना राजस्थान तथा मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना है 50:50
- इस परियोजना में 3 चरणों में 4 बांधों का निर्माण किया गया है
- प्रथम चरण – गांधी सागर 115mw, कोटा बेराज
- द्वितीय चरण- राणा प्रताप सागर 172 mw
- तृतीय चरण -जवाहर सागर 99mw
- यह परियोजना 1953 में निर्मित है।
- इस परियोजना के अंतर्गत गांधी सागर मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में बनाया गया
- कोटा बैराज कोटा सिंचाई बांध हैइस बांध से दो मुख्य नेहरे दाएं तरफ तथा बाईं तरफ निकाली नहीं है।
- राणा प्रताप सागर चित्तौडगढ़ जिले में बनाया गया है
- जवाहर सागर कोटा जिले में स्थित है।
- इस परियोजना में कुल 386 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
- जिसमें 153 मेगावाट विद्युत राज्य प्राप्त करता हैयह परियोजना कोटाबूंदीबारा मे सिंचाई उपलब्ध करवाती है
गांधीसागर बांध
यह बांध 1960 में मध्यप्रदेश की भानुपुरा तहसील में बनाया गया है। यह बांध चैरासीगढ़ में 8 कि.मी. पहले एक घाटी में बना हुआ है। इससे 2 नहरें निकाली गई है।
बाई नहर – बुंदी तक जाकर में ज नदी में मिलती है।
दांयी नहर – पार्वत नदी को पार करके मध्यप्रदेश में चली जाती है यहां पर गांधी सागर विधुत स्टेशन भी है।
राणा – प्रताप सागर बांध
यह बांध गांधी सागर बांध से 48 कि.मी. आगे चित्तौड़गढ़ में चुलिया जल प्रपात के समीप रावतभाटा नामक स्थान पर 1970 में बनाया गया है।
जवाहर सागर बांध
इसे कोटा बांध भी कहते हैं, यह राणा प्रताप सागर बांध से 38 कि.मी. आगे कोटा के बोरावास गांव में बना हुआ है।
कोटा बैराज – इसे चंबल का सिंचाई बांध कहा जाता है।
यह कोटा शहर के पास बना हुआ है। इसमें से दो नहरें निकलती है।
दायीं नहर – पार्वती व परवन नदी को पार करके मध्यप्रदेश में चली जाती है। बायी नहर – कोटा, बुंदी, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली मे जलापूर्ति करती है।
इस पर 14 लिफ्ट हैं जिसमें 8 राजस्थान में स्थित हैं
1. दिगोन्द लिफ्ट
2. पचेल लिफ्ट
3. कचारी लिस्ट
4. गणेशगंज लिफ्ट
5. अंता लिफ्ट
6. अंता माइनर लिफ्ट
7. सोरखंड लिफ्ट
8. जालीपुरा लिफ्ट