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You can find notes,question and quiz on various topic in Hindi. India Gk. Notes
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पवन अनुवर्ती या रेखीय बालुका स्तूप
इन बालुका स्तूप को सोर महोदय के द्वारा तीन प्रकार में विभाजित किया गया है
1. सीफ़
2. वनस्पति युक्त रेखीय
3. पवन विमुख रेखीय बालुका स्तूप
इन बालुका स्तूप ऊपर वनस्पति अवश्य दिखाई देती है। यह बालुका स्तूप लंबवत समानांतर श्रेणियों के समान दिखाई देते हैं उत्तरी पूर्वी थार मरुस्थल में दृषद्वती नदी तथा सांभर की मेढा नदी की घाटी में ऐसे पुराने बालुका स्तूप देखने को मिलते हैं
इनका विस्तार वायु की दिशा के अनुरूप दक्षिण पश्चिम दिशा से उत्तर पूर्व दिशा की तरफ रहता है यह बालुका स्तूप लंबवत समांतर श्रेणी के समान दिखाई देते हैं
यह जैसलमेर के दक्षिण पश्चिम में रामगढ़ के दक्षिण पश्चिम में व जोधपुर तथा बाड़मेर जिले में पाए जाते हैं।
यह वायु के समकोण होते हैं। जब दीर्घकाल तक वायु एक ही दिशा में चलती है। तब पवन की दिशा के समकोण पर इन प्रकार के बालुका स्तूप का निर्माण होता है।
अवस्थिति – यह थार मरुस्थल के पूर्वी तथा उत्तरी भागों में भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र के बीकानेर जिले के पुंगल के चारों तरफ, दक्षिणी गंगानगर जिले के रावतसर व सूरतगढ़, चूरु व झुंझुनू जिले में पाए जाते हैं।
नोट – बरखान, पैराबोलिक व अनुप्रस्थ बालुका स्तूप समकोण बालुका स्तूप के उदाहरण है।
अवस्थिति – यह बालुका स्तूप पश्चिमी मरू प्रदेश के प्रत्येक जिले में पाए जाते हैं।
इसका निर्माण अनियमित पवनों के क्षेत्र में होता है। जैसलमेर के मोहनगढ़ व पोकरण तथा गंगानगर के सूरतगढ़ क्षेत्र में जैसलमेर के पास हमादा स्थलाकृति के निकट देखने को मिलते हैं।
अवरोधी बालुका स्तूप – किसी भी अवरोध के कारण जब बालू का निक्षेप होने लगता है। इन्हें वशिष्ट अवरोधी जीवाश्म युक्त बालुका स्तूप भी कहा जाता है। यह बालुका स्तूप किसी भी पर्वत के पावनानुमुखी व पवनविमुखी दोनों ढाल पर पाए जाते हैं। इनका आकार टीले के नुमा होता है। राज्य में पुष्कर, बूढ़ा पुष्कर, जोबनेर पहाड़, सीकर के हर्ष पहाड़ियां, कुचामन की पहाड़ियां आदि क्षेत्र में देखने को मिलते हैं। सामान्यतः यह बालुका स्तूप स्थिर बालुका स्तूप होते हैं।
नेटवर्क बालुका स्तूप – मरुस्थल में रेखीय, अनुप्रस्थ व पैराबोलिक बालुका स्तूप के र पिछले भागों पर व इनके बीच में नेटवर्क बालूका स्तूप का निर्माण होता है। यह बालुका स्तूप बहुमुखी अंकुशनुमा बालुका स्तूप होते हैं। इनका विस्तार उत्तरी -पूर्वी मरुस्थल में पाया जाता है। यह बालुका स्तूप उत्तर – पूर्वी मरुस्थल क्षेत्र से हरियाणा के हिसार भिवानी क्षेत्र तक विस्तृत है। स्क्रब कापीस बालुका स्तूप छोटी-छोटी झाड़ियां तथा घास के झुंड आदि के आसपास जब बालू का निक्षेप होने लगता है। तो इनका निर्माण होता है। यह बालुका स्तूप नव चंद्राकार आकृति के होते हैं। सर्वाधिक बीकानेर जिले में इस प्रकार के बालुका स्तूप बनते हैं। इन्हें नेबखा व लूनेट भी कहा जाता है। इनकी प्रकृति स्थिर होती है।
अर्ग/इर्ग – वनस्पति रहित क्षेत्र में मंद पवन संचलन के कारण निर्मित उर्मिकाओं से युक्त रेतीला मरुस्थल अर्ग नाम से जाना जाता है।
कारवां या गासी- बरखान बालुका स्तूप के मध्य स्थित प्राकृतिक मार्ग
धरियन – जैसलमेर में गतिशील बालुका स्तूप को स्थानीय भाषा में धरियन के नाम से जाना जाता है।
प्लाया – बालुका स्तूप के मध्य वर्षा का जल भरने के फलस्वरूप बनने वाली अस्थाई झील
रन या टाट – जब अस्थाई प्लाया झील का पानी धीरे-धीरे नमकीन दलदल में परिवर्तित होने लगता है तो इसे रन या टाट के नाम से जानते हैं। राज्य में सर्वाधिक रन जैसलमेर जिले में पाए जाते हैं। थोब रन जोधपुर में पाया जाता है।
यह राज्य के 41.50 % भू- भाग पर फैला हुआ है।
हम्मादा – जैसलमेर के पोकरण, जोधपुर के फलौदी व बाड़मेर के बालोतरा के मध्य 300 मीटर से अधिक ऊंचाई पर अवस्थित पथरीला मरुस्थल क्षेत्र हम्मादा के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र में तृतीय काल से प्लीस्टोसीन काल के मध्य तक की चुना चट्टाने पाई जाती है।
आकल वुड फॉसिल पार्क – जैसलमेर के दक्षिण में अवस्थित इसका निर्माण जुरासिक काल में हुआ है। यहां पर जुरासिक काल के जीवाश्म पाए जाते हैं। इसे काष्ठ जीवाश्म पार्क के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर पाए जाने वाले जीवाश्म की आयु 18 करोड़ वर्ष मानी गई है।
बाप बोल्डर – जोधपुर जिले के समीप अवस्थित बाप गांव जहां पर पर्मो कार्बोनिफरस युग के हिमनद द्वारा निर्मित चट्टानों के अवशेष पाए जाते हैं। इन्हें बाप बोल्डर कहते हैं।
लाठी क्षेत्र – यह पर ट्रियासिक काल में निर्मित है। जैसलमेर जिले में पोकरण से मोहनगढ़ तक 60 किलोमीटर की एक भूगर्भिक जल पट्टी जिसे लाठी क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। यहां पर अवस्थित चांदनन लकूप थार का घड़ा कहलाया जाता है। जल होने के कारण इस क्षेत्र पर सेवण व धामण घास पाई जाती है। लाठी क्षेत्र में रॉक फास्फेट खनिज सर्वाधिक पाया जाता है। यहां पर टर्शियरी कालीन चट्टानों में तेल गैस भंडार देखने को मिलते हैं।
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